नवत्रात्रि त्यौहार पर निबंध हिंदी में! Navratri Festival Pr Nibandh Hindi Mein

नवरात्री त्यौहार भारतवर्ष में बहुत ही धूम धाम से मनाये जाने वाला पर्व है.नवरात्री शब्द से तातपर्य :-नव का अर्थ नौ है और रात्रि का अर्थ रात से है नवरात्री शब्द संस्कृत भाषा का शब्द है.नवरात्री वर्ष में चार बार मनाया  जाता है नवरात्री पर्व में रात्रि के दौरान तीन देवियो महालक्ष्मी और महासरवती और दुर्गा माता के नौ सवरूपो की पूजा की जाती है जिन्हे नवदुर्गा कहते है। इन् नौ रातो और दस दिनों के दौरान शक्ति/देवी के दौरान देवी के नौ सवरूपो की पूजा की जाती है.नवरात्री एक बहुत ही महत्वपूण त्यौहार है जिसे पूरे भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इन् नौ देवियो की पूजा की जाती है। 


  1. शैलीपुत्री:-पहारो वाली माता। 
  2. बहॄमचारिणी:-ब्रह्मचारिणी माता। 
  3. चद्रघंटा:-चंद्रमा की तरह चमकने वाली माता। 
  4. कुष्माण्डा:-पूरा जगत उनके पैरो में है। 
  5. स्कंदमाता:-कार्तिक स्वामी की माता। 
  6. कात्यायनी:-कतयां आश्रम में जननी माता। 
  7. कालरात्रि:-काल का नाश करने वाली माता। 
  8. महागौरी:-सफेद रंग वाली माँ। 
  9. शिदिरात्री:-सर्व शिधि देने वाली माँ। 

वैसे तो नवरात्रो के बहुत ही कथा प्रशिद्ध है पर एक बहुत ही प्रमुख कथा है जोकि इस प्रकार है जब श्री राम और रावण का युद्ध चल राह था तो बरह्मा जी ने श्री राम से चंडी देवी का पूजन कर चंडी देवी को प्रशन्न करने को कहा अपितु चंडी पूजन हेतु हवन सामग्री और एक सौ आठ नीलकमल की व्यवस्था की गई वही दूसरी ओर रावण ने अमरता के लोभ में विजय कामना से चंडी पाठ प्रारभ किया यह बात इंद्र देव ने पवन देव के माध्यम से श्री राम तक पहुंचाई की रावण के यह पाठ यथासंभव पूर्ण  होने दिया जाए। 

इधर हवन सामग्री में से पूजा सथल से एक नीलकमल रावण की मायावि शक्ति के चलते गायब हो गया तो राम का सकल्प टूटता सा नजर आने लगा भय इस बात का था की देवी माँ रूस्ट न हो जाए अचानक से नीलकमल की व्यास्था अशंभव थी तब अचानक भगवन राम को समरण हुआ की लोग मुझे कमलयन नवकच लोचन कहते है क्यों न मैं चंडी पूजन की पूर्ति के लिए अपनी नेत्र अर्पित करू तभी वह शीघ्र अपने बाण से नेत्र निकालने के लिए तत्पर होते है तभी चंडी देवी प्रकट होकर उनका हाथ पकड़ कर कहती है राम मैं प्रसन्न हु और विजय श्री का आशीर्वाद दिया। 

वही दूसरी और रावण के चंडी पाठ में यज्ञ कर रहे बराह्मणो के बीच हनुमान जी भी बराह्मन बालक का रूपधर बाह्मणो की सेवा में लगे हुए थे बराह्मणो निश्वार्थ सेवा देख कर हनुमान जी से वर मांगने को कहा हनुमान जी ने कहा अगर प्रभु आप मुझसे खुस है तो आप जिस मंत्र से यज्ञ कर रहे है उसका एक अक्षर मेरे कहने से बदल दीजिए बराह्मण इस रहष्य  को समझ नहीं पाए और तथास्तु  का वर दे दिया। 

मन्त्र में जयादेवी। ..... भूर्तिहरिणी में "ह" के स्थान पर "क" का उच्चारण करे यही मेरी इच्छा है। भूर्तिहरिणी का मतलब है प्राणियों की पीड़ित को हरने वाली और करिणी का अर्थ हो गया प्राणियों को पीड़ित करने वाली जिससे चंडी देवी रुस्त  हो गई और रावण का सर्वनाश करवा दिया हनुमान जी ने ह के स्थान पर क करवाकर यज्ञ की दिशा ही बदल दी। इस्सलिये भी नवरात्रे का त्यौहार मनाया जाता है नवरात्रो की यह कथा बहुत ही प्रमुख है। 

नवरात्रि के पहले तीन दिन

नवरात्रे के पहले तीन दिन देवी दुर्गा की पूजा के रखे गए है यह पूजा उनकी ऊर्जा और शक्ति की जाती है प्रत्येक दिन दुर्गा के अलग अलग रूपों की पूजा की जाती है पहले दिन बालिकाओ की और दूसरे दिन युवती और तीसरे दिन महिला के परिकवता के चरण में पहुंचने के लिए की जाती है 

नवरात्रि के चौथा से छठे दिन
जब इंसान अहकार कोर्ध और वासना पर अन्य बुराई पर विजय प्रात्प कर लेता है और उससे अपने में शून्य होने का अभ्यास होता है.और अधयत्मिक धन और समृद्धि प्रात्प करने के लिए लक्ष्मी पूजा करता है। नवरतरे के चौथे पाचवे और छठे दिन लक्ष्मी पूजा को संपित है.


नवरात्रि का सातवां और आठवां दिन


नवरात्रे के सातवे दिन कला और ज्ञान की देवी सरस्वती देवी की पूजा की जाती है नवरात्रे का सातवा और आठवा दिन देवी सरस्वती को समर्पित है 

नवरात्रि का नौवां दिन
नौवा दिन नवरात्रि समारोह का अंतिम दिन है। यह महानवमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन कन्या पूजन होता है। 

बड़े पैमाने पर नवरात्रे मानाने वाला शहर जाने। 
नवरात्रे वैसे तो भारत के अलग अलग भागो में अलग अलग तरीको से मनाया जाता है लेकिन गुजरात में इस त्यौहार को बहुत ही बड़े पैमाने पर मनाया जाता है गुजरात में नवरात्रे समारोह को ढाढिया और गरबा के नाम से जाना जाता है.यह कार्यक्रम पूरी रात चलता है ढाढिया का अनुभव बहुत ही असधरणा है देवी के भक्ति के प्रदर्शन में गरबा आरती से पहले किया जाता है ढाढिया समारोह उसके बाद। 

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